:
Breaking News

घोषणा बनाम हकीकत: विजय कुमार सिन्हा के आदेश के बावजूद बिहार में खुलेआम बिक रहा सड़क किनारे मांस

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना: बिहार में खुले में मांस बिक्री पर सख्ती की घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हाल ही में साफ शब्दों में कहा था कि राज्य में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मांस बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन घोषणा के बाद भी कई शहरों और कस्बों में खुलेआम मांस की दुकानें संचालित होती दिख रही हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
घोषणा के बाद भी नहीं दिखा असर
राज्य सरकार की ओर से निर्देश जारी होने के बाद उम्मीद थी कि नगर निकाय और स्थानीय प्रशासन सख्ती दिखाएंगे। मगर पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा समेत कई जिलों में सड़कों के किनारे और बाजारों में खुले में मांस की बिक्री जारी है। कई जगह दुकानदार बिना ढके मांस लटकाकर बेचते नजर आ रहे हैं, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की घोषणा तो जोरदार होती है, लेकिन उसका पालन कराने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं दिखती। कुछ नागरिकों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में खानापूर्ति के तौर पर छापेमारी हुई, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकार स्पष्ट निर्देश दे चुकी है, तो स्थानीय प्रशासन अमल कराने में क्यों नाकाम है। नगर निकायों के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के लिए नियमित निगरानी और पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होती है, जबकि कई जगह स्टाफ की कमी और अन्य प्रशासनिक चुनौतियां सामने आती हैं।
वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बयानबाजी से व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और लगातार कार्रवाई जरूरी है।
स्वास्थ्य और कानून दोनों का मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में मांस बिक्री न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का भी मामला है। बिना स्वच्छ व्यवस्था के खुले में मांस बेचने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि मांस की बिक्री निर्धारित मानकों और लाइसेंस के तहत ही होनी चाहिए।
सरकार की मंशा बनाम जमीनी हकीकत
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही व्यवस्था सुधारने की हो, लेकिन जब तक स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसे आदेश कागजों तक सीमित रह जाते हैं। प्रशासनिक मशीनरी की ढिलाई और निगरानी की कमी इस समस्या की बड़ी वजह मानी जा रही है।
लोगों की मांग — दिखे ठोस कार्रवाई
राज्य के विभिन्न इलाकों से यह मांग उठ रही है कि सरकार केवल घोषणाएं करने के बजाय नियमित निरीक्षण, जुर्माना और लाइसेंस प्रणाली को सख्ती से लागू करे। लोगों का कहना है कि जब तक नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई नहीं होगी, तब तक खुले में मांस बिक्री पर रोक लगाना मुश्किल है।कुल मिलाकर, बिहार में खुले में मांस बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर सख्ती दिखाकर व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला पाती है या यह मामला भी केवल बयान तक सीमित रह जाता है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *